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रागी/ मंडुआ की खेती | Ragi/Finger millet cultivation

रागी (Finger Millet) एक महत्वपूर्ण मोटा अनाज है जिसे भारत में बाजरा परिवार का “सुपरफूड” भी कहा जाता है। यह खासतौर पर दक्षिण भारत, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में उगाई जाती है। नीचे रागी फसल की विस्तृत जानकारी सरल भाषा में प्रस्तुत है:


🌾 रागी (मंदुआ/नाचनी) फसल की सम्पूर्ण जानकारी

🔹 वैज्ञानिक नाम: Eleusine coracana

🔹 कुल: Poaceae

🔹 प्रमुख नाम:

  • हिंदी – मंदुआ, रागी
  • इंग्लिश – Finger Millet
  • दक्षिण भारत में प्रचलित नाम– रागी / नाचनी

 रागी फसल का महत्व

  • ग्लूटेन-फ्री अनाज, पाचन के लिए अत्यंत उपयोगी
  • कैल्शियम की सबसे अधिक मात्रा अनाजों में पाई जाती है
  • डायबिटीज के लिए लाभकारी (लो GI इंडेक्स)
  • सूखा प्रतिरोधी, कम पानी में भी अच्छी उपज
  • कम लागत में खेती, छोटे किसानों के लिए लाभदायक

 रागी की पसंदीदा जलवायु

  1. तापमान -20–30°C 
  2. आदर्शवर्षा500–1000 
  3. मिमीऊँचाईसमुद्र तल से 100–1500 मीटर तक
  4. विशेषता- सूखा सहनशील, कम पानी में भी उग जाती है 

मिट्टी की आवश्यकता

  • हल्की से मध्यम दोमट मिट्टी सबसे अच्छी
  • pH: 5.5–7.5 होना चाहिए 
  • हल्की अम्लीय मिट्टी भी उपयुक्त
  • जल निकास अच्छा होना चाहिए
  • बंजर/काली मिट्टी/रेतीली मिट्टी में भी उग सकती है।

 रागी की उन्नत किस्में

भारत में प्रमुख किस्में

  • GPU-28
  • GPU-67
  • GPU-48
  • PRM-1, PRM-2 (उत्तराखंड)
  • MR-6, MR-1
  • CO-12
  • KOPN-942

ये किस्में अधिक उपज, रोग प्रतिरोध और कम अवधि वाली मानी जाती हैं।


बोआई का समय

खरीफ की फसल - जून–जुलाई तथा रबी (कुछ स्थान)अक्टूबर–नवंबर

बीज दर और बोआई विधि

➡ड्राईलैंड (सूखा क्षेत्र)  5-7 किग्रा/हेक्टेयर

➡ट्रांसप्लांटिंग → 3–4 किग्रा/हेक्टेयर

बोआई विधि-

सीधा प्रसारण (Broadcasting) - क्यारी में पौध तैयार कर रोपाई (Transplanting)

लाइन बुवाई (Rows: 22–30 cm distance)- रोपाई वाली विधि में उपज अधिक मिलती है।

खाद एवं उर्वरक प्रबंधन

प्रति हेक्टेयर अनुशंसित खुराक:

  • N : 40–60 किग्रा
  • P₂O₅ : 20–30 किग्रा
  • K₂O : 20–30 किग्रा
  • 5–6 टन गोबर खाद

बीज उपचार: PSB + Trichoderma

सिंचाई प्रबंधन

आमतौर पर बरसाती खेती, 1–2 सिंचाई भी काफी

महत्वपूर्ण समय:

  • टिलरिंग स्टेज
  • हेड इमर्जेन्स (बालियाँ निकलते समय)

रागी का खरपतवार प्रबंधन

  • पहली निराई : 20–25 दिन
  • दूसरी निराई : 35–40 दिन

हर्बिसाइड:

  • 2,4-D 1 लीटर/हेक्टेयर (30 DAS)

रोग एवं कीट नियंत्रण

ब्लास्ट (Blast)

रोकथाम → कार्बेन्डाजिम + मैनकोजेब स्प्रे

➡लीफ स्पॉट

रोकथाम → कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 2–3 gm/L

मुख्य कीट

  • घुँघरू सुंडी (Cutworm)
  • स्टेम बोरर
  • थ्रिप्स

नियंत्रण → नीम तेल 5 ml/L या सावधानी से क्लोरपाइरीफॉस का प्रयोग

कटाई एवं उपज

कटाई समय

  1. बुवाई के 90–120 दिन बाद
  2. जब बालियाँ भूरी होकर दाना कठोर हो जाए

उपज:

  • अनाज: 15–25 क्विंटल/हेक्टेयर
  • पराली/भूसा: 40–60 क्विंटल/हेक्टेयर

 रागी का उपयोग

  • रागी आटा
  • रागी इडली/डोसा
  • रागी लड्डू
  • रागी पोषक ड्रिंक
  • शिशु आहार
  • रागी कुकीज़ / हेल्दी फूड
  • रागी हड्डियों, बच्चों, बुजुर्गों और डायबिटीज रोगियों के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है।

रागी/ मंडुआ की खेती | Ragi/Finger millet cultivation

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